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शब्दों की दुनिया

Sein

जर्मन भाषा का 'Sein' शब्द हिंदी के 'होना' क्रिया की तरह है, जो किसी भी वस्तु या विचार के अस्तित्व का मूल आधार है। जैसे हिंदी में 'भाव' शब्द से हम 'स्वभाव', 'प्रभाव', या 'अभाव' जैसे कई शब्द बनाते हैं, जहाँ मूल विचार तो वही रहता है पर आगे लगने वाला उपसर्ग उसका पूरा परिदृश्य बदल देता है, ठीक वैसा ही यहाँ भी होता है। 'Sein' का अर्थ है 'होना' या 'अस्तित्व'। जब इसके आगे 'Da-' लगता है, तो 'Dasein' बनता है, जिसका अर्थ है 'यहाँ होना' या बस 'अस्तित्व'। यह एक दार्शनिक गहराई लिए हुए शब्द है, जीवन का ठोस सच। इसी 'Dasein' से 'Daseinsberechtigung' जैसा भारी-भरकम शब्द बनता है—'अस्तित्व का अधिकार'। आप देख सकते हैं कि कैसे जर्मन भाषा, संस्कृत की तरह ही, दो या तीन विचारों को एक साथ गूँथकर एक नया, सटीक शब्द बना लेती है—'अस्तित्व' (Dasein) + 'अधिकार' (Berechtigung)। वहीं दूसरी ओर, 'Bewusstsein' शब्द है, जिसमें 'Sein' का मतलब 'होना' है और 'bewusst' का अर्थ है 'जागरूक'। तो 'Bewusstsein' यानी 'जागरूक होना' या 'चेतना'। यह शब्द किसी की निजी मानसिक अवस्था से लेकर 'Klassenbewusstsein' यानी किसी पूरे वर्ग की सामूहिक चेतना तक पहुँच जाता है। यह दिखाता है कि एक ही जड़ से निकले शब्द कैसे एक व्यक्ति के मन की निजी दुनिया से लेकर समाज और राष्ट्र के विशाल मंच तक की कहानी कह सकते हैं।

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